भादवा मेले में लाखों भक्त पैदल रामदेवरा पहुँचते हैं — कोई 50 किमी से, तो कोई 500 किमी से भी ज़्यादा चलकर। सुरक्षित पदयात्रा के लिए संघ के साथ चलें, सड़क के किनारे एक कतार में चलें, रात में रिफ्लेक्टिव जैकेट या टॉर्च रखें, और पैरों व पानी का पूरा ध्यान रखें।
पदयात्रा की परंपरा
बाबा रामदेव जी के भक्त सदियों से पैदल रुणिचा जाते रहे हैं। आज भी भादवा महीने में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और आसपास से पैदल यात्री (जातरू) हाथ में बाबा का नेजा (सफ़ेद या रंगीन ध्वजा) लेकर, भजन गाते हुए चलते हैं। बहुत से गाँवों से पूरा “संघ” एक साथ निकलता है, जिसके साथ एक सहायता वाहन रहता है। रास्ते में लोग सेवा शिविर लगाकर पदयात्रियों को भोजन, पानी, चाय, दवा और आराम की जगह देते हैं।
कब निकलें
मेला भादवा सुदी बीज से एकादशी तक चलता है (2027 में लगभग 2–11 सितंबर — भादवा मेला)। अपनी दूरी के हिसाब से रोज़ 25–40 किमी चलने का अनुमान लगाकर प्रस्थान की तारीख तय करें। उदाहरण: 300 किमी के लिए लगभग 8–12 दिन। अपने शहर से दूरी दूरी तालिका में देखें।
तैयारी: क्या साथ ले जाएँ
- जूते: पहले से पहने हुए, आरामदायक स्पोर्ट्स जूते; नए जूते से छाले पड़ते हैं। 2–3 जोड़ी सूती मोज़े।
- पैरों के लिए: छालों की पट्टी, वैसलीन/क्रीम, पैर धोने के लिए छोटा तौलिया।
- पानी: बोतल, ORS के पैकेट, ग्लूकोज़।
- धूप और रात: टोपी/गमछा, धूप का चश्मा; रात के लिए रिफ्लेक्टिव जैकेट और टॉर्च।
- दवाएँ: अपनी रोज़ की दवाएँ, दर्द और बुखार की दवा, पेट की दवा।
- कागज़: पहचान पत्र, संघ प्रमुख और घर के फ़ोन नंबर लिखी पर्ची, पावर बैंक।
- हल्का बैग: भारी सामान संघ के सहायता वाहन में रखें।
सड़क पर सुरक्षा
- राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक कतार में, सड़क के बिल्कुल किनारे चलें।
- रात में और सुबह अंधेरे में सबसे ज़्यादा दुर्घटनाएँ होती हैं — रिफ्लेक्टिव जैकेट पहनें, समूह में चलें, और देर रात चलने से बचें।
- नेजा या झंडा ऐसे पकड़ें कि वाहनों का रास्ता न रुके।
- सड़क पार करते समय समूह एक साथ, सावधानी से पार करे।
- पुलिस और प्रशासन द्वारा बताए गए रास्ते और विश्राम स्थल अपनाएँ।
स्वास्थ्य का ध्यान
- दोपहर की तेज़ धूप में (लगभग 12 से 4 बजे) आराम करें; सुबह जल्दी और शाम को चलें।
- हर घंटे थोड़ा पानी पिएँ; पेशाब का रंग गहरा हो तो पानी कम है।
- चक्कर, तेज़ सिरदर्द या उल्टी हो तो तुरंत रुकें, छाँव में बैठें और नज़दीकी मेडिकल शिविर जाएँ।
- बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, दिल/शुगर/BP के मरीज़ डॉक्टर की सलाह के बाद ही लंबी पदयात्रा करें।
सेवा शिविर
मेले के दिनों में जोधपुर, नागौर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर की ओर से आने वाले मुख्य रास्तों पर जगह-जगह सेवा शिविर लगते हैं। इनकी जगह हर साल बदलती है। शिविरों की जानकारी अपने संघ, स्थानीय समाचार पत्रों और रास्ते में मिलने वाले पदयात्रियों से लें। शिविर में खाना बर्बाद न करें और सफ़ाई रखें।
रामदेवरा पहुँचकर
पहुँचते ही भीड़ में सीधे कतार में न लगें — पहले आराम करें, पानी पिएँ और सामान ठहरने की जगह पर रखें। बहुत से पदयात्री रामसरोवर पर हाथ-पैर धोकर दर्शन के लिए जाते हैं। दर्शन के नियम: दर्शन के नियम व सुझाव। ठहरना: धर्मशाला सूची। लौटने के लिए ट्रेन/बस पहले से बुक करें — ट्रेन जानकारी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रामदेवरा पैदल यात्रा कब होती है?
मुख्य रूप से भादवा महीने में, भादवा मेले (भादवा सुदी बीज–एकादशी) से पहले।
रोज़ कितना चलें?
सामान्य रूप से 25–40 किमी, सेहत और मौसम के अनुसार।
क्या रास्ते में खाने-पीने की व्यवस्था होती है?
मेले के दिनों में मुख्य रास्तों पर सेवा शिविर लगते हैं, पर अपना पानी और ज़रूरी सामान ज़रूर रखें।
रात में चलना सुरक्षित है?
देर रात चलने से बचें। मजबूरी हो तो समूह में, रिफ्लेक्टिव जैकेट और टॉर्च के साथ चलें।
यह सामान्य मार्गदर्शन है; प्रशासन और संघ के निर्देश सर्वोपरि हैं। अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026।
॥ जय बाबा रामदेव जी ॥