रामदेवरा दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी  |  भादवा मेला 2027 — 2–11 सितंबर (संभावित)

भादवा मेला रामदेवरा 2027 — तारीख, इतिहास व पूरी जानकारी

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🎪 भादवा मेला — रामदेवरा

भाद्रपद माह आते ही राजस्थान के हर कोने से, और देश के दूसरे राज्यों से भी, लाखों श्रद्धालु एक ही दिशा में चल पड़ते हैं — रामदेवरा। यही वह समय है जब बाबा रामदेव जी का भादवा मेला लगता है — राजस्थान के सबसे बड़े लोक-मेलों में से एक, जिसे कई लोग “छोटा कुंभ” भी कहते हैं। दस दिनों तक चलने वाला यह मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिन्दू-मुस्लिम एकता, लोक-संस्कृति और गहरी आस्था का जीवंत उत्सव है।

2–11 सितंबर
भादवा मेला 2027 (संभावित)
10 दिन
द्वितीया से एकादशी तक
11 सितंबर
समाधि-दिवस (एकादशी) 2027, संभावित — सबसे ज़्यादा भीड़
लाखों
श्रद्धालु प्रतिवर्ष

भादवा मेला 2027 की तारीख

भादवा मेला हर साल भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक मनाया जाता है — हिन्दू पंचांग पर आधारित होने के कारण हर साल तारीख अंग्रेज़ी कैलेंडर में थोड़ी बदल जाती है। पंचांग के अनुसार 2027 में भादवा मेला लगभग 2 सितंबर (गुरुवार) से 11 सितंबर (शनिवार) तक रहने की संभावना है — बाबा री बीज (भादवा सुदी बीज, बाबा रामदेव जयंती) लगभग 2 सितंबर 2027 को और मेले का समापन एकादशी (लगभग 11 सितंबर) को होगा। कुछ पंचांगों में तिथि-आरंभ के कारण 1 सितंबर से भी गणना दी जाती है। मेला प्रशासन और मंदिर समिति की आधिकारिक घोषणा आमतौर पर मेले से कुछ सप्ताह पहले होती है — घोषणा होते ही हम यह पेज अपडेट करेंगे। (2026 का मेला 12–21 सितंबर को संपन्न हुआ।) रहेगा।

वर्ष तारीख
2026 12 – 21 सितंबर (संपन्न)
2027 2 – 11 सितंबर (संभावित)
2028 23 अगस्त – 2 सितंबर (संभावित)

मेला पंचांग की तिथि पर आधारित है, इसलिए यात्रा से ठीक पहले स्थानीय पंचांग या प्रशासन की घोषणा से एक बार पुष्टि कर लेना उचित रहता है।

भादवा मेला 2027 की तैयारी — कब क्या करें

मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं, इसलिए जितनी जल्दी योजना बनाएँ उतना अच्छा। 2 सितंबर 2027 (संभावित) को ध्यान में रखकर यह समय-सारणी उपयोगी है:

कब क्या करें
जून 2027 यात्रा की तारीखें तय करें; अपने समाज/ट्रस्ट की धर्मशाला से संपर्क कर कमरे की बात करें।
जुलाई 2027 (शुरुआत) ट्रेन टिकट की बुकिंग आमतौर पर यात्रा से लगभग 60 दिन पहले खुलती है — अगस्त के अंत/सितंबर की शुरुआत की यात्रा के लिए जुलाई की शुरुआत में बुकिंग खुलने पर टिकट लें। ट्रेन जानकारी
अगस्त 2027 मेला स्पेशल ट्रेनों और प्रशासन की व्यवस्था (पार्किंग, मार्ग, दर्शन समय) की घोषणाओं पर नज़र रखें; हम समाचार पेज पर अपडेट देंगे।
पदयात्री पदयात्रा पर जाने वाले संघ आमतौर पर बीज से 7–15 दिन पहले अपने गाँव/शहर से निकलते हैं; जूते, दवाइयाँ और रात में चलने के लिए रिफ्लेक्टिव जैकेट/टॉर्च साथ रखें।
मेले के दिन सुबह जल्दी या देर रात दर्शन का प्रयास करें; दर्शन समय मेले में बढ़ाया जाता है।

अपने शहर से रामदेवरा कितनी दूर है और कैसे पहुँचें — 71 शहरों की दूरी तालिका देखें।

रामदेवरा के अन्य उत्सव

मेले के दस दिन — क्या होता है कब

मेले की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को ब्रह्म मुहूर्त में समाधि पर पंचामृत अभिषेक के साथ होती है, इसके बाद मंगला आरती और भोग अर्पित किया जाता है — इसी दिन को बाबा रामदेव जी का जन्मोत्सव भी माना जाता है। अगले आठ दिनों में श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार बढ़ता जाता है, पदयात्री दल गाँव-गाँव से पहुँचते रहते हैं, और रात्रि में भजन-कीर्तन व तेरहताली नृत्य का सिलसिला चलता रहता है। दसवें और अंतिम दिन — भाद्रपद शुक्ल एकादशी को समाधि-दिवस मनाया जाता है, जो मेले का सबसे बड़ा दिन होता है, जब भीड़ अपने चरम पर होती है।

पदयात्रा — मेले की आत्मा

भादवा मेले की सबसे खास पहचान है इसकी पैदल यात्रा। मेला शुरू होने से हफ्तों पहले ही अलग-अलग गाँवों और शहरों से श्रद्धालुओं के जत्थे पैदल निकल पड़ते हैं — हाथ में जलती हुई जोत लिए, कंधे पर रंग-बिरंगी निशान पताका टांगे, रास्ते भर “बोलो बाबा री सा” के जयकारे लगाते हुए। कई यात्री सैकड़ों किलोमीटर की दूरी दिनों में तय करते हैं। रास्ते में जगह-जगह गाँववाले और सामाजिक संगठन मुफ्त भोजन, पानी और विश्राम के शिविर लगाते हैं — यह सहयोग की भावना ही मेले को इतना खास बनाती है।

रुणिचा पहुँचकर पदयात्री सबसे पहले मंदिर की परिक्रमा करते हैं, अपनी निशान पताका मंदिर परिसर में स्थापित करते हैं, और फिर दर्शन की कतार में लगते हैं। कई परिवार पीढ़ियों से हर साल यह यात्रा करते आ रहे हैं — यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि पारिवारिक परंपरा बन चुकी है।

तेरहताली — मेले की सांस्कृतिक पहचान

मेले की रातें भजन-कीर्तन से गूंजती हैं, और इसका सबसे आकर्षक हिस्सा है तेरहताली नृत्य — कामड़ समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत एक अनूठी बैठी हुई नृत्य-शैली, जिसमें शरीर से बंधी तेरह मंजीराओं की थाप पर लयबद्ध नृत्य होता है। कई कलाकार इसे और चुनौतीपूर्ण बनाते हुए मुंह में तलवार दबाकर या सिर पर घड़ा संतुलित करते हुए भी प्रस्तुति देती हैं। यह नृत्य मूलतः बाबा रामदेव जी की भक्ति में ही विकसित हुआ था, और आज राजस्थान की लोक-कला की पहचान बन चुका है।

भोग और भंडारा

मेले में चूरमा और दाल-बाटी पारंपरिक भोग के रूप में विशेष महत्व रखते हैं। जगह-जगह लगे भंडारों में कोई भी श्रद्धालु — बिना किसी भेदभाव के — मुफ्त भोजन पा सकता है। यह सामुदायिक सेवा-भावना बाबा रामदेव जी के समानता के संदेश को आज भी जीवंत रखती है।

मेले के दौरान व्यवस्था

भारी भीड़ को संभालने के लिए समाधि समिति, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ग्राम पंचायत मिलकर विशेष इंतज़ाम करते हैं — अतिरिक्त दर्शन कतारें, चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था और सुरक्षा बल तैनात किए जाते हैं। रेलवे भी मेले के दौरान कई रूटों पर विशेष ट्रेनें चलाता है ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।

मेले में यात्रा के लिए ज़रूरी सुझाव

✅ ये ज़रूर करें
ठहरने की बुकिंग 2-3 महीने पहले करें · आरामदायक जूते व पानी साथ रखें · समाधि-दिवस से एक-दो दिन पहले पहुंचने की कोशिश करें ताकि भीड़ कम मिले · कीमती सामान संभालकर रखें

❌ इनसे बचें
समाधि-दिवस पर आखिरी समय की यात्रा योजना से बचें · दोपहर की तेज़ धूप में बिना विश्राम लंबी दूरी न चलें · भीड़ में बच्चों और बुज़ुर्गों का हाथ न छोड़ें

मेले के इतिहास की एक झलक

भाद्रपद शुक्ल एकादशी को ही बाबा रामदेव जी ने रुणिचा में जीवित समाधि ली थी, और तभी से हर साल इसी तिथि पर उनके भक्त यहाँ एकत्र होते आए हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है — हर साल मेले की गिनती आगे बढ़ती जाती है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह आस्था पीढ़ी-दर-पीढ़ी और मज़बूत होती गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भादवा मेला 2027 में कब है?
पंचांग के अनुसार भादवा मेला 2027 लगभग 2 से 11 सितंबर तक रहेगा (संभावित); बाबा री बीज लगभग 2 सितंबर 2027 को है। आधिकारिक घोषणा के बाद तारीख की पुष्टि करें।

भादवा मेला कितने दिन चलता है?
यह मेला भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक, यानी कुल दस दिनों तक चलता है।

मेले में सबसे ज़्यादा भीड़ किस दिन होती है?
मेले के अंतिम दिन, यानी समाधि-दिवस (एकादशी) पर सबसे ज़्यादा भीड़ होती है।

तेरहताली नृत्य क्या है?
यह कामड़ समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत एक पारंपरिक बैठा हुआ नृत्य है, जिसमें शरीर से बंधी तेरह मंजीराओं की थाप पर नृत्य किया जाता है। यह मूलतः बाबा रामदेव जी की भक्ति में विकसित हुआ था।

क्या मेले के दौरान मंदिर में रात को भी दर्शन हो सकते हैं?
हां, मेले के दौरान मंदिर लगभग चौबीसों घंटे खुला रहता है ताकि भारी भीड़ को दर्शन में असुविधा न हो।

मेले के लिए ठहरने की बुकिंग कब करनी चाहिए?
मेले के दौरान होटल और धर्मशालाएं जल्दी भर जाती हैं, इसलिए 2-3 महीने पहले बुकिंग करना बेहतर रहता है।

यात्रा से जुड़ी अन्य जानकारी

॥ जय बाबा रामदेव जी, जय रामशाह पीर ॥