रामदेवरा दर्शन की सम्पूर्ण जानकारी  |  भादवा मेला 2027 — 2–11 सितंबर (संभावित)

भजन-आरती — बाबा रामदेव जी की आरती, चालीसा व भक्ति

होम › भजन-आरती — बाबा रामदेव जी की आरती, चालीसा व भक्ति

🙏 भक्ति

बाबा रामदेव जी — जिन्हें रामसा पीर, रुणिचा रा धणी और पीरों के पीर कहा जाता है — की भक्ति में आरती, चालीसा, भजन और जम्मा-जागरण का विशेष स्थान है। इस भाग में आपको बाबा की आरती, चालीसा, उनके परचों की कथाएं और मंदिर के दैनिक आरती-समय की जानकारी एक जगह मिलेगी।

इस भाग में क्या है

जम्मा-जागरण की परंपरा

मारवाड़ में बाबा रामदेव जी की भक्ति का सबसे जीवंत रूप “जम्मा” है — रात भर चलने वाला जागरण, जिसमें तंदूरा, मंजीरा और ढोलक के साथ बाबा के भजन गाए जाते हैं। कामड़िया पंथ के कलाकारों का तेरहताली नृत्य भी इसी परंपरा का हिस्सा है, जिसमें महिलाएं शरीर पर बंधे मंजीरों को लय में बजाती हैं। भादवा मेले के दौरान रामदेवरा में जगह-जगह जम्मे लगते हैं।

बाबा की भक्ति में प्रतीक

  • घोड़ा (लीले घोड़े): बाबा लीले घोड़े पर सवार माने जाते हैं, इसलिए भक्त कपड़े के घोड़े चढ़ाते हैं।
  • पगल्या (चरण चिह्न): बाबा के चरण-चिह्नों की पूजा की जाती है।
  • नेजा (ध्वजा): पाँच रंगों की ध्वजा बाबा के मंदिरों की पहचान है।
  • बीज (शुक्ल पक्ष की द्वितीया): हर महीने की सुदी बीज बाबा की पूजा का विशेष दिन माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बाबा रामदेव जी की आरती कब होती है?

रामदेवरा में मंगला (सुबह 4:30–5), भोग (8), दोपहर (3:45–4), संध्या (6–7) और शयन (रात 9) आरती होती है — आरती पेज।

बाबा रामदेव जी के परचे क्या हैं?

बाबा के चमत्कारों की लोक-कथाएं, जो जम्मा-भजनों में गाई जाती हैं — सभी परचे।

बाबा की पूजा का विशेष दिन कौन-सा है?

हर महीने की शुक्ल द्वितीया (बीज); भादवा सुदी बीज बाबा की जयंती है — बीज कैलेंडर।

जम्मा क्या है?

बाबा का रात भर चलने वाला भजन-जागरण, जिसमें तंदूरा-मंजीरे के साथ परचे गाए जाते हैं।

यात्रा की योजना: रामदेवरा यात्रा गाइड · मंदिर · उत्सव