डाली बाई का मंदिर रामदेवरा में बाबा रामदेव जी की समाधि के पास ही है। डाली बाई बाबा की परम भक्त और धर्म बहन थीं। लोक-मान्यता के अनुसार उन्होंने बाबा से एक दिन पहले, उसी स्थान पर समाधि ली जो बाबा ने अपने लिए चुना था। समाधि दर्शन के बाद ज़्यादातर भक्त यहाँ भी दर्शन करते हैं।
डाली बाई कौन थीं
लोक-कथाओं के अनुसार डाली बाई मेघवाल समाज की एक कन्या थीं, जो बाबा रामदेव जी को एक पेड़ के नीचे मिलीं। बाबा ने उन्हें अपनी धर्म बहन माना और उन्होंने जीवन भर बाबा की सेवा की। बाबा रामदेव जी ने छुआछूत और ऊँच-नीच का विरोध किया और सबको समान माना — डाली बाई की कथा इसी संदेश का सबसे जाना-माना उदाहरण है।
उनकी पूरी कथा डाली बाई का परचा पेज पर पढ़ें।
डाली बाई की समाधि की कथा
मान्यता है कि जब बाबा ने समाधि लेने के लिए स्थान खुदवाया, तब डाली बाई ने कहा कि यह स्थान उनका है, और प्रमाण के रूप में खुदाई में उनकी वस्तुएँ निकलीं। तब बाबा ने वह स्थान डाली बाई को दिया, जिन्होंने वहाँ समाधि ली। बाबा ने पास में ही अपनी समाधि ली। इसीलिए रामदेवरा में बाबा की समाधि के पास डाली बाई की समाधि भी पूजी जाती है।
डाली बाई का कंगन
मंदिर परिसर के पास पत्थर का एक बड़ा गोल छल्ला है, जिसे “डाली बाई का कंगन” कहा जाता है। बहुत से श्रद्धालु इसके बीच से निकलते हैं। लोक-विश्वास है कि इससे रोग और कष्ट दूर होते हैं। भीड़ के समय यहाँ धक्का-मुक्की न करें, और बच्चों व बुज़ुर्गों को सँभालकर निकलवाएँ।
दर्शन कब करें
डाली बाई मंदिर बाबा की समाधि के दर्शन के समय के आसपास खुला रहता है। सुबह जल्दी और दोपहर बाद आम दिनों में कम भीड़ रहती है। भादवा मेले और बीज के दिन यहाँ भी लंबी कतार लगती है।
आसपास और क्या देखें
मंदिर परिसर के बाकी स्थल: डाली बाई मंदिर · रामसरोवर · परचा बावड़ी। दर्शन का समय यहाँ देखें, और बाबा के जीवन की कथा बाबा रामदेव जी का जीवन पेज पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डाली बाई का मंदिर कहाँ है?
रामदेवरा में बाबा रामदेव जी की समाधि के पास, मंदिर परिसर के निकट।
डाली बाई कौन थीं?
बाबा रामदेव जी की परम भक्त और धर्म बहन, जिन्हें लोक-कथा के अनुसार बाबा ने अपनाया था।
डाली बाई का कंगन क्या है?
पत्थर का गोल छल्ला जिसके बीच से श्रद्धालु निकलते हैं; यह एक लोक-आस्था है।
यह जानकारी लोक-परंपरा और कथाओं पर आधारित है। अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026।
॥ जय बाबा रामदेव जी ॥