📍 रामदेवरा के आसपास
संक्षेप में: पोकरण किला, जिसे बालागढ़ भी कहा जाता है, रामदेवरा से केवल लगभग 12 किमी दूर पोकरण कस्बे में स्थित ऐतिहासिक किला है। यह मारवाड़ (जोधपुर) के राठौड़ों की चंपावत शाखा के ठाकुरों का ठिकाना रहा है। आज किले के एक हिस्से में संग्रहालय है और एक हिस्सा हेरिटेज होटल के रूप में चलता है। रामदेवरा आने वाला लगभग हर श्रद्धालु इसे आधे दिन में आसानी से देख सकता है।
- स्थान: पोकरण कस्बा, जैसलमेर ज़िला, राजस्थान
- रामदेवरा से दूरी: लगभग 12 किमी (सड़क से 15–20 मिनट)
- किसका ठिकाना: चंपावत राठौड़ (मारवाड़-जोधपुर की शाखा)
- संग्रहालय: किले के भीतर — हथियार, वेशभूषा, लघु चित्र आदि
- समय (स्रोतों के अनुसार): सुबह 9 से शाम 5 बजे
- प्रवेश शुल्क (स्रोतों के अनुसार): लगभग ₹50 प्रति व्यक्ति
पोकरण किले का इतिहास
पोकरण थार रेगिस्तान के बीच बसा एक प्राचीन कस्बा है। राजस्थानी में “पोकरण” का अर्थ “पाँच खारे टीलों/क्षेत्रों से घिरा स्थान” बताया जाता है। सदियों तक यह जैसलमेर और जोधपुर के बीच के व्यापार-मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसी कस्बे के बीच खड़ा है बालागढ़ — लाल-पीले बलुआ पत्थर से बना वह किला जिसने इस क्षेत्र के इतिहास को देखा है।
पोकरण मारवाड़-जोधपुर के राठौड़ों की चंपावत शाखा के ठाकुरों का ठिकाना रहा। स्वतंत्रता से पहले के अंतिम जागीरदार भवानी सिंह थे, जो बाद में न्यायाधीश बने और पहली लोकसभा के सदस्य भी रहे। किले के निर्माण का श्रेय लोक-स्रोतों और पर्यटन वेबसाइटों में राव मालदेव को दिया जाता है, पर निर्माण की सदी को लेकर स्रोतों में मतभेद है — इसलिए हम यहाँ कोई एक तिथि पक्की नहीं लिख रहे।
बाबा रामदेव जी से संबंध
बाबा रामदेव जी की कथाओं में पोकरण का विशेष स्थान है। लोक-मान्यता के अनुसार पोकरण क्षेत्र में भैरव राक्षस का आतंक था, जिसे बाबा ने समाप्त किया और उजड़े पोकरण को फिर से बसाया — पूरी कथा भैरव राक्षस का परचा में पढ़ें। बाबा के पिता अजमल जी तंवर भी लोक-परंपरा में पोकरण क्षेत्र से जुड़े माने जाते हैं। इसलिए बहुत से श्रद्धालु रामदेवरा के दर्शन के बाद पोकरण भी अवश्य जाते हैं।
किले में क्या देखें
- संग्रहालय: किले के भीतर स्थित संग्रहालय में पोकरण के शासकों से जुड़े हथियार, कवच, वेशभूषा, बर्तन और लघु चित्र (मिनिएचर पेंटिंग) प्रदर्शित हैं।
- स्थापत्य: झरोखे, जालीदार खिड़कियाँ, आँगन और ऊँची प्राचीर — राजपूत स्थापत्य की झलक।
- छत से दृश्य: किले के ऊपरी हिस्सों से पोकरण कस्बे और आसपास के रेगिस्तान का विस्तृत दृश्य दिखता है।
- हेरिटेज होटल: किले का एक हिस्सा “The Fort Pokaran” नाम से हेरिटेज होटल के रूप में चलता है — ठहरने का अनुभव चाहें तो सीधे होटल से बुकिंग की जानकारी लें।
पोकरण की अन्य पहचान
पोकरण का नाम देश भर में भारत के परमाणु परीक्षणों से भी जुड़ा है — 18 मई 1974 को यहाँ भारत का पहला परमाणु परीक्षण (“स्माइलिंग बुद्धा”, पोकरण-I) हुआ, और 11–13 मई 1998 को पाँच परीक्षण (“ऑपरेशन शक्ति”, पोकरण-II) किए गए। परीक्षण स्थल सैन्य क्षेत्र में है और आम पर्यटकों के लिए खुला नहीं है। इसके अलावा पोकरण अपने मिट्टी के बर्तनों (पोकरण पॉटरी) के लिए भी जाना जाता है — स्मृति-चिह्न के रूप में खरीदे जा सकते हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय और ज़रूरी सुझाव
अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय है। किला देखने में 1.5–2 घंटे लगते हैं; संग्रहालय के लिए अतिरिक्त समय रखें। भादवा मेले के दिनों में पोकरण में भी भीड़ और ट्रैफिक रहता है, इसलिए सुबह जल्दी जाएँ।
- गर्मियों (अप्रैल–जून) में दोपहर का तापमान बहुत अधिक रहता है — सुबह जल्दी या शाम को जाएँ, पानी, टोपी और सनस्क्रीन साथ रखें।
- सर्दियों (दिसंबर–जनवरी) में रेगिस्तान की सुबह-शाम ठंडी होती है — हल्के गर्म कपड़े रखें।
- रास्ते में दुकानें कम हैं; नकद और पानी पहले से रखें, क्योंकि हर जगह UPI या नेटवर्क नहीं मिलता।
- ऐतिहासिक संरचनाओं पर चढ़ने, कुछ लिखने या नुकसान पहुँचाने से बचें — ये हमारी साझा धरोहर हैं।
- पोकरण के बाज़ार में मिट्टी के बर्तन (पोकरण पॉटरी) स्मृति-चिह्न के रूप में खरीदे जा सकते हैं।
रामदेवरा से पोकरण किला कैसे जाएँ
- टैक्सी/जीप: रामदेवरा से पोकरण लगभग 12 किमी है — 15–20 मिनट। आने-जाने की टैक्सी या शेयर जीप आसानी से मिलती है; देखें टैक्सी सेवा।
- बस: जोधपुर–जैसलमेर मार्ग की कई बसें रामदेवरा–पोकरण होकर चलती हैं।
- ट्रेन: पोकरण स्टेशन भी जोधपुर–जैसलमेर लाइन पर है; रामदेवरा से एक स्टेशन दूर।
रामदेवरा यात्रा के साथ कैसे जोड़ें
सबसे आसान योजना: सुबह मंगला आरती और समाधि दर्शन के बाद डाली बाई मंदिर और रामसरोवर देखें, फिर दोपहर में पोकरण किला (2–3 घंटे) और शाम को संध्या आरती के लिए रामदेवरा लौट आएँ। जैसलमेर जा रहे हैं तो पोकरण रास्ते में ही पड़ता है — जैसलमेर यात्रा गाइड देखें। मेले के दिनों में रामदेवरा में कमरे न मिलें तो पोकरण के होटल अच्छा विकल्प हैं।
रामदेवरा के आसपास और क्या देखें
पोकरण किला (बालागढ़) के साथ रामदेवरा यात्रा में ये स्थान भी जोड़े जा सकते हैं। दूरी और समय के अनुसार अपनी योजना बनाएँ — पास के स्थान (पोकरण) आधे दिन में, जैसलमेर क्षेत्र के स्थल 1–2 दिन में, और जोधपुर-बीकानेर के स्थल आने-जाने के रास्ते में देखे जा सकते हैं।
- कुलधरा गाँव — पालीवाल ब्राह्मणों का 13वीं सदी का गाँव, जो 19वीं सदी में रहस्यमय ढंग से उजड़ गया।
- खाबा किला — उजड़े गाँव के बीच पहाड़ी किला, ऊपर से अद्भुत दृश्य और जीवाश्म संग्रहालय।
- सम के धोरे — थार के सबसे प्रसिद्ध रेत के टीले — ऊँट सफारी, सूर्यास्त और डेजर्ट कैंप।
- डेजर्ट नेशनल पार्क — गोडावण का घर, चिंकारा, प्रवासी पक्षी और करोड़ों वर्ष पुराने जीवाश्म।
- जैसलमेर — सोनार किला, जैन मंदिर, नक्काशीदार हवेलियाँ और गड़ीसर झील।
- जोधपुर — मसूरिया पहाड़ी का बाबा रामदेव मंदिर, मेहरानगढ़ और नीली नगरी।
- बीकानेर व बाड़मेर — देशनोक का करणी माता मंदिर, शाही छतरियाँ, गजनेर और जैन तीर्थ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पोकरण किला रामदेवरा से कितनी दूर है?
लगभग 12 किमी, सड़क से 15–20 मिनट।
पोकरण किले का दूसरा नाम क्या है?
बालागढ़।
पोकरण किला किसका ठिकाना था?
मारवाड़ के राठौड़ों की चंपावत शाखा के ठाकुरों का।
क्या किले में संग्रहालय है?
हाँ, हथियार, वेशभूषा और लघु चित्रों वाला संग्रहालय है।
पोकरण किले का समय और शुल्क क्या है?
स्रोतों के अनुसार सुबह 9 से शाम 5 बजे, शुल्क लगभग ₹50 — जाने से पहले पुष्टि करें।
क्या परमाणु परीक्षण स्थल देख सकते हैं?
नहीं, वह सैन्य क्षेत्र है और आम लोगों के लिए खुला नहीं है।
स्रोत
Wikipedia — Pokhran, Holidify, HotelDekho — समय, शुल्क और नियम बदल सकते हैं; जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि करें। दूरियाँ सड़क मार्ग से अनुमानित हैं। अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026।
और देखें: रामदेवरा के आसपास घूमने की जगहें · दर्शन समय · टैक्सी सेवा · होटल
॥ जय बाबा रामदेव जी ॥